मेथाडोन मेंटेनेंस थेरेपी (Methadone Maintenance Therapy – MMT)
पाठ्यक्रम: जीएस-2 / स्वास्थ्य
सन्दर्भ
- 26 जून, अंतर्राष्ट्रीय मादक पदार्थ दुरुपयोग एवं अवैध तस्करी निरोध दिवस के अवसर पर पंजाब ने सरकारी अस्पतालों में मेथाडोन मेंटेनेंस थेरेपी (MMT) के छह केंद्रों(clinics) का उद्घाटन किया।
परिचय
- मेथाडोन मेंटेनेंस थेरेपी (MMT), जिसे मेथाडोन उपचार चिकित्सा (MTT) भी कहा जाता है, हेरोइन, अफीम तथा चिकित्सकीय पर्चे पर मिलने वाली ओपिऑयड दर्दनिवारक दवाओं के आदी व्यक्तियों के लिए चिकित्सकीय निगरानी में दी जाने वाली उपचार पद्धति है।
- इसमें मेथाडोन, जो एक दीर्घकालिक प्रभाव वाला ओपिऑयड एगोनिस्ट है, का चिकित्सकीय निगरानी में उपयोग किया जाता है, जिससे नशे की तीव्र इच्छा (Craving) कम होती है तथा नशा छोड़ने पर होने वाले लक्षणों से राहत मिलती है, बिना अवैध ओपिऑयड सेवन से होने वाले तीव्र नशे की अनुभूति उत्पन्न किए।
- एगोनिस्ट (Agonist): ऐसा पदार्थ (जैसे दवा या हार्मोन), जो कोशिका के अभिग्राही (Receptor) से जुड़कर जैविक प्रतिक्रिया उत्पन्न करता है।
- इस उपचार को परामर्श, मनोसामाजिक सहयोग तथा नियमित चिकित्सकीय अनुवर्ती देखभाल के साथ जोड़ा जाता है, जिससे रोगियों के पुनर्वास, अधिक मात्रा में नशा लेने के जोखिम, पुनः नशे की लत तथा संक्रामक रोगों के प्रसार को कम करने में सहायता मिलती है।
- इसे विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा अनुशंसित किया गया है तथा राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (NACO) के दिशा-निर्देशों के अंतर्गत कड़ी चिकित्सकीय निगरानी में लागू किया जाता है।
- भारत में MMT की शुरुआत वर्ष 2012 में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, NACO तथा संयुक्त राष्ट्र मादक पदार्थ एवं अपराध कार्यालय (UNODC) के सहयोग से पायलट परियोजनाओं के रूप में की गई थी।
- पंजाब वर्ष 2012 में MMT लागू करने वाला देश का पहला राज्य बना।
स्रोत: IE
साबांग बंदरगाह
पाठ्यक्रम: जीएस-2 / अंतरराष्ट्रीय संबंध; जीएस-3 / अवसंरचना
सन्दर्भ
- प्रधानमंत्री मोदी की हालिया यात्रा के दौरान भारत और इंडोनेशिया ने मलक्का जलडमरूमध्य के निकट स्थित साबांग बंदरगाह के संयुक्त विकास पर सहमति व्यक्त की।
परिचय
- साबांग बंदरगाह इंडोनेशिया के आचे प्रांत के वेह द्वीप पर, सुमात्रा के उत्तरी छोर पर स्थित है।
- इसका सबसे बड़ा रणनीतिक लाभ मलक्का जलडमरूमध्य के निकट होना है, जो विश्व के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों (Maritime Chokepoints) में से एक है।
- चीन के लगभग 80% तेल आयात तथा उसके व्यापार का बड़ा भाग इसी समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है।
- यह बंदरगाह भारत के ग्रेट निकोबार द्वीप पर विकसित हो रहे अंतर्राष्ट्रीय ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल से लगभग 160 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
- ये दोनों स्थान मिलकर पूर्वी हिन्द महासागर और दक्षिण-पूर्व एशिया को जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण रणनीतिक समुद्री गलियारा विकसित कर सकते हैं।

- महत्व: इन दोनों सुविधाओं के माध्यम से भारत विश्व के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में से एक पर प्रभावी निगरानी रख सकेगा, अपनी समुद्री निगरानी क्षमता बढ़ा सकेगा तथा हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में अपनी रणनीतिक स्थिति को और मजबूत करेगा।
- साबांग बंदरगाह ‘एक्ट ईस्ट नीति’ को सुदृढ़ करेगा तथा अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह और इंडोनेशिया के आचे प्रांत के बीच समुद्री संपर्क को बेहतर बनाएगा।
स्रोत: BS
नवी मुंबई हवाई अड्डे को औषधियों के आयात हेतु प्रवेश बंदरगाह घोषित किया गया
पाठ्यक्रम: जीएस-2 / स्वास्थ्य
सन्दर्भ
- स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने औषधि नियम, 1945 के अंतर्गत नवी मुंबई हवाई अड्डे को औषधियों के आयात हेतु प्रवेश बंदरगाह के रूप में अधिसूचित किया है।
- इसके साथ ही सड़क, रेल, समुद्र एवं वायु मार्ग सहित औषधियों के आयात हेतु अधिसूचित प्रवेश बंदरगाहों की कुल संख्या बढ़कर 42 हो गई है।
परिचय
- औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 के अनुसार भारत में औषधियों का आयात केवल अधिसूचित प्रवेश बंदरगाहों के माध्यम से ही किया जा सकता है।
- इस निर्णय से औषधीय खेपों के आवागमन में सुविधा होगी, औषधि आपूर्ति से संबंधित अवसंरचना सुदृढ़ होगी तथा आयातकों को एक अतिरिक्त प्रवेश बिंदु उपलब्ध होने से अधिक लचीलापन मिलेगा।
भारत में औषधियों का विनियमन
केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO):
- भारत के औषधि महानियंत्रक (DCGI) के नेतृत्व में कार्य करता है।
- औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 के अंतर्गत भारत में औषधियों की गुणवत्ता का नियमन करता है।
राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA):
- औषधि (मूल्य नियंत्रण) आदेश, 2013 (DPCO) के अंतर्गत औषधियों की कीमतें निर्धारित एवं संशोधित करता है।
भारतीय औषध संहिता आयोग (IPC):
- भारतीय औषध संहिता के समय-समय पर प्रकाशन का दायित्व निभाता है, जो औषधियों के मानकों का आधिकारिक संकलन है।
राज्य स्वास्थ्य विनियामक उत्कृष्टता सूचकांक (SHRESTH):
- राज्यों की औषधि नियामक व्यवस्था का मूल्यांकन एवं सुदृढ़ीकरण करने हेतु एक पारदर्शी एवं आँकड़ा-आधारित राष्ट्रीय पहल।
स्रोत: PIB
भारत में ऊर्जा भंडारण की बढ़ती मांग
पाठ्यक्रम: जीएस-3 / ऊर्जा
सन्दर्भ
- भारत में बढ़ती विद्युत मांग तथा नवीकरणीय ऊर्जा के बढ़ते एकीकरण को देखते हुए वर्ष 2035–36 तक ऊर्जा भंडारण की आवश्यकता बढ़कर 888 गीगावाट-घंटे (GWh) होने का अनुमान है।
भारत में ऊर्जा भंडारण की आवश्यकता
- इंडिया एनर्जी स्टोरेज एलायंस (IESA) तथा कस्टमाइज्ड एनर्जी सॉल्यूशंस (CES) की रिपोर्ट के अनुसार भारत को आवश्यकता होगी—
- 321 GWh – बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों (BESS) से।
- 567 GWh – पम्प्ड स्टोरेज परियोजनाओं (PSP) से।
- वर्तमान में भारत की स्थापित ऊर्जा भंडारण क्षमता केवल लगभग 1 GWh है, जो आवश्यक क्षमता की तुलना में अत्यंत कम है।
बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS)
- BESS ऐसी प्रणाली है जिसमें बैटरियों के माध्यम से विद्युत उत्पादन संयंत्रों से उत्पन्न ऊर्जा को संग्रहित किया जाता है तथा आवश्यकता पड़ने पर उपयोग में लाया जाता है।
इसके प्रमुख घटक हैं—
- इन्वर्टर – जो प्रत्यक्ष धारा (DC) को प्रत्यावर्ती धारा (AC) तथा AC को DC में परिवर्तित करता है।
- ट्रांसफॉर्मर – जो प्रणाली के वोल्टेज को विद्युत ग्रिड के अनुरूप बनाता है।
- सहायक प्रणालियाँ।
- BESS प्रौद्योगिकी विद्युत-रासायनिक बैटरियों पर आधारित होती है, जो नवीकरणीय ऊर्जा संयंत्रों द्वारा उत्पन्न ऊर्जा का भंडारण करती हैं।
बैटरियों के प्रकार
- लिथियम-आयन बैटरी: इनमें लिथियम का उपयोग आयरन एवं फॉस्फेट जैसे पदार्थों के साथ किया जाता है, जैसे लिथियम फेरोफॉस्फेट (LFP) बैटरी।
- ठोस-अवस्था बैटरी (Solid-State Battery): इनमें द्रव इलेक्ट्रोलाइट के स्थान पर ठोस इलेक्ट्रोलाइट (जैसे सिरेमिक या सिंथेटिक मैटेरियल) का उपयोग किया जाता है।
स्रोत: DTE
इजिप्टियन गिद्ध
पाठ्यक्रम: जीएस-3 / समाचारों में प्रजातियाँ
चर्चा में क्यों ?
- भारत में इजिप्टियन गिद्ध की जनसंख्या में तीव्र गिरावट दर्ज की गई है।
इजिप्टियन गिद्ध
- वैज्ञानिक नाम: Neophron percnopterus
- यह विश्व के सबसे छोटे गिद्धों में से एक है।
- आवास एवं वितरण:यह खुले मैदानी एवं पर्वतीय क्षेत्रों में पाया जाता है तथा मृत पशुओं का मांस, कीट, जैविक अपशिष्ट, छोटे जीव, अंडे तथा मल आदि खाता है।
- इसका वितरण दक्षिणी यूरोप, उत्तरी एवं मध्य अफ्रीका, मध्य पूर्व, मध्य एशिया तथा भारतीय उपमहाद्वीप में है।
दक्षिण भारत में इन गिद्धों की वर्तमान स्थिति
- भारत में इसकी स्थानीय उप-प्रजाति Neophron percnopterus ginginianus पाई जाती है।
- अफ्रीका एवं मध्य पूर्व से आने वाले प्रवासी पक्षी भी शीत ऋतु में भारत आते हैं।
- कर्नाटक एवं तमिलनाडु में अब 150 से भी कम स्थानीय इजिप्टियन गिद्ध शेष बचे हैं।
खतरे
- गिद्धों के लिए हानिकारक पशु-चिकित्सीय गैर-स्टेरॉयडल सूजनरोधी औषधियों (NSAIDs), विशेषकर डाइक्लोफेनाक का उपयोग।
- विद्युत ग्रिड के विस्तार से विद्युताघात(Electrocution)।
- आकस्मिक विषाक्तता एवं विषैले पदार्थों का उपयोग।
- घोंसला बनाने वाली चट्टानों का विनाश एवं व्यवधान।
- पारंपरिक पशुपालन में कमी, जिससे प्राकृतिक भोजन की उपलब्धता घट रही है।
संरक्षण की स्थिति
- अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) द्वारा इसे इंडेन्जर्ड (Endangered) श्रेणी में रखा गया है।

स्रोत:TH
शोधकर्ताओं ने चिप पर मानव प्लेसेंटा के प्रमुख कार्यों को पुनः र्निर्मित किया
पाठ्यक्रम: जीएस-3 / विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
सन्दर्भ
- आईसीएमआर–राष्ट्रीय महिला स्वास्थ्य अनुसंधान संस्थान (पूर्व नाम: ICMR-NIRRCH), मुंबई ने आईआईटी बॉम्बे के सहयोग से स्वदेशी लैब में निर्मित ‘प्लेसेंटा-ऑन-चिप’ प्लेटफार्म विकसित किया है।
परिचय
- नाम के विपरीत, यह कोई इलेक्ट्रॉनिक चिप नहीं है। यह एक पारदर्शी प्लास्टिक उपकरण है, जिसमें एक छिद्रयुक्त झिल्ली पर मानव प्लेसेंटा कोशिकाओं तथा मानव एंडोथीलियल कोशिकाओं को विकसित किया जाता है।
- ये मिलकर उस संपर्क क्षेत्र(interface) का निर्माण करती हैं, जिसके माध्यम से माँ और भ्रूण के बीच पोषक तत्व, हार्मोन तथा अन्य अणुओं का आदान-प्रदान होता है।
- अधिकांश अन्य प्रणालियों के विपरीत, जिन्हें जटिल सूक्ष्म-द्रव (Microfluidic) उपकरणों की आवश्यकता होती है, यह मॉडल एक स्थिर द्वि-कक्षीय मंच(two-chamber platform) है, जिसका उपयोग स्टैंडर्ड लैब में भी किया जा सकता है।
यह उपकरण मानव प्लेसेंटा के कई महत्वपूर्ण कार्यों का पुनर्निर्माण करता है, जैसे—
- हार्मोन उत्पादन
- पोषक तत्वों का स्थानांतरण
- अपशिष्ट का आदान-प्रदान
- चयनात्मक अवरोध (Selective Barrier)
- यह मंच प्लेसेंटा की जीवविज्ञान, गर्भावस्था संबंधी जटिलताओं तथा गर्भावस्था के दौरान औषधियों के प्रभाव का अध्ययन करने में उपयोगी सिद्ध होगा।

प्लेसेंटा
- प्लेसेंटा गर्भावस्था के दौरान सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक है।
- यह भ्रूण को ऑक्सीजन एवं पोषक तत्व उपलब्ध कराती है, अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालती है, गर्भावस्था को बनाए रखने के लिए आवश्यक हार्मोन का निर्माण करती है तथा चयनात्मक अवरोध (Selective Barrier) के रूप में कार्य करती है। यह निर्धारित करती है कि माँ के रक्तप्रवाह से कौन-कौन से पदार्थ विकसित हो रहे शिशु तक पहुँचेंगे।
- इसका सुचारु कार्य भ्रूण की वृद्धि, गर्भावस्था के परिणामों तथा गर्भावस्था के दौरान दी जाने वाली औषधियों की सुरक्षा को प्रभावित करता है।
स्रोत: TH
गैलेक्सआई ने ‘मिशन दृष्टि’ का प्रक्षेपण किया
पाठ्यक्रम: जीएस-3/विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
सन्दर्भ
- अंतरिक्ष स्टार्टअप गैलेक्सआई द्वारा विकसित विश्व के पहले ऑप्टोसार (OptoSAR) सैटेलाइट ‘मिशन दृष्टि’ को प्रक्षेपण एवं प्रारंभिक कक्षा चरण (LEOP) के अंतिम चरण में भू-चुंबकीय सौर तूफान (geomagnetic solar storm)के कारण तकनीकी असामान्यता का सामना करना पड़ा।
परिचय
- मिशन दृष्टि एक 190 किलोग्राम वजनी पृथ्वी अवलोकन उपग्रह है। यह विश्व का पहला उपग्रह है, जिसमें विद्युत-प्रकाशीय (Electro-Optical) तथा सिंथेटिक एपर्चर रडार (Synthetic Aperture Radar) सेंसर्स को एक ही परिचालन मंच पर एकीकृत किया गया है, जिससे हर मौसम में तथा दिन या रात में उच्च गुणवत्ता के चित्र प्राप्त किए जा सकते हैं।
- बेहतर डेटा एनालिसिस के लिए सैटेलाइट में मल्टीस्पेक्ट्रल कैमरा और SAR इमेजर, दोनों लगे हैं।
- यह हाई रिजॉल्यूशन (High Resolution) वाले चित्र प्रदान करता है तथा भविष्य के सैटेलाइट में एक मीटर से कम विभेदन(sub-metre resolution) प्राप्त करने का लक्ष्य है।
महत्त्व
- यह द्वि-उपयोगी (Dual-use) सैटेलाइट है, जिसका उपयोग नागरिक एवं रक्षा दोनों क्षेत्रों में किया जा सकता है।
इसके प्रमुख उपयोग हैं—
- कृषि निगरानी
- आपदा प्रबंधन
- समुद्री निगरानी
- अवसंरचना मानचित्रण
स्रोत: TH